Pramod Sharma
गोंडा:विश्व बन्धुता के जनक थे तथागत बुद्ध। समता,करुणा,प्रज्ञा,प्यार।मानवता का यह आधार। आगे आओ धम्म अपनाओ।मानवता को गले लगाओ। मानव-मानव एक समान। बुद्ध धम्म की यह पहचान। बुद्धि-विवेक का खोले जो द्वार।वह है समता,करुणा,प्रज्ञा,प्यार।प्रज्ञा,सील,समाधि के सम्यक अनुसीलन से ही मानव का परम कल्याण होता है। बुद्ध,धम्म और संघ मानव को दुख मुक्त करने के तीन रत्न हैं और पंचसील मानव के चरित्र की कसौटी है। मानव ही नहीं समस्त प्राणी-जगत को दुख मुक्त का एकमात्र मार्ग बुद्ध दर्शन है। बुद्ध दर्शन विश्व के सभी धर्मो का मार्ग दर्शक है। इस दर्शन में करुणा और मन की पवित्रता ही सर्वोपरि है। यही दर्शन तो विश्व बन्धुता का जनक कहा जाता है।* उक्त विचार त्रिविधि पावनी बुद्ध पूर्णिमा पर विश्व शांति मैत्रेय बुद्ध विहार न्यास द्वारा आयोजित कार्यक्रम में रानीपुरवा में ए.के.नन्द न्यास के मंत्री और सम्पादक, मास संदेश ने व्यक्त किया। हरिशंकर सिंह ने कहा कि बुद्ध का धम्म मध्यम मार्गी धम्म है। अमृतलाल गौतम ने कहा कि मानव मूल्यों का रक्षक है। भागीरथी मौर्य ने कहा विश्व बन्धुता का प्रतीक ही बुद्ध धम्म है।राम लौटन ने कहा कि तर्कवाद और मानववाद का प्रतीक बुद्ध धम्म है।उमेश कुमार ने कहा कि अवैज्ञानिक रीति-रिवाज और संस्कार से मुक्त कराने का कार्य बुद्ध धम्म करता है। आरके कारूष ने कहा कि बुद्ध का धम्म प्रकृति का धम्म है। राम प्रकाश बौद्ध ने कहा कि बुद्ध धम्म ज्ञान विज्ञान का मार्ग है। रमेश विमल ने कहा कि बुद्ध का मार्ग सीलवान आचरणवान बनाता है। कार्यक्रम में हरिप्रसाद,रमेश गौतम,छोटेलाल,दशरथा बौद्ध,उर्मिला बौद्ध,सावित्री बौद्ध ,राम करन वर्मा-एडवोकेट,शिव कुमार विश्वकर्मा,आनंद कुमार सेन,मीना बौद्ध,प्रीति बौद्ध,एम.एल.गौतम,ज्ञान चन्द्र,प्रमोद,राजबहादुर,मंजू सरोज आदि अनेक लोगों ने सहभाग किया।
बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन,तथागत बुद्ध के विचार ही मानवता का आधार

