दुनिया के पहले ए आई बच्चे का जन्म,निसंतान दंपत्ति के लिए होगा एक वरदान

 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल अब सिर्फ अपना काम आसान करने के लिए ही नहीं बल्कि बच्चे पैदा करने के लिए भी किया जाने लगा है। जी हां AI की मदद से दुनिया के पहले बच्चे ने जन्म ले लिया है, जिसने इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट की दिशा ही बदल दी है। दुनिया के पहले एआई पावर्ड आईवीएफ बच्चे का जन्म उन महिलाओं के लिए आशा की किरण है जो किसी कारणवश मां नहीं बन पाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक AI की मदद से IVF सिस्टम का इस्तेमाल करके दुनिया का पहला बच्चा पैदा हुआ है, यह सिस्टम इंट्रासाइटोप्लाजमिक स्पर्म इंजेक्शन (आईसीएसआई) की पारंपरिक मैनुअल प्रक्रिया की जगह लेती है, जो कि IVF में इस्तेमाल की जाने वाली एक आम विधि है। आईवीएफ प्रोसेस के दौरान पुरुष के स्पर्म और महिला के एग को फर्टिलाइज कराया जाता है। फिर एब्रियो को ट्रांसफर किया जाता है। इस पुरी प्रॉसेस में स्पर्म सलेक्शन से लेकर इंजेक्ट और ट्रांसफर का काम डॉक्टर का होता है।

सबसे पहले AI एल्गोरिद्म माइक्रोस्कोपिक इमेजेस का विश्लेषण करके सबसे उपयुक्त शुक्राणु का चयन करता है। लेजर की सहायता से चुने गए शुक्राणु को निष्क्रिय किया जाता है, जिससे उसे संभालना आसान हो जाता है। AI नियंत्रित रोबोटिक प्रणाली के माध्यम से शुक्राणु को अंडाणु में सटीकता से इंजेक्ट किया जाता है। इस प्रक्रिया के सभी 23 चरणों को बिना किसी मानव हस्तक्षेप के, केवल AI और रिमोट डिजिटल नियंत्रण के माध्यम से पूरा किया जाता है। 

एक 40 वर्षीय महिला, जो पिछले असफल प्रयास के बाद डोनर अंडे के साथ आईवीएफ उपचार करवा रही थी, इस नई स्वचालित प्रक्रिया का उपयोग करके गर्भवती हो गई। एक भ्रूण स्वस्थ ब्लास्टोसिस्ट में विकसित हुआ, जिसे फ्रीज किया गया और बाद में स्थानांतरित किया गया, जिससे एक स्वस्थ बच्चे का जन्म हुआ। स्वचालित प्रणाली ने शुक्राणु इंजेक्शन प्रक्रिया के हर हिस्से को संभाला, जिसमें AI के साथ शुक्राणु का चयन करना, इसे लेजर से स्थिर करना और इसे अंडे में इंजेक्ट करना शामिल है – यह सब मानव की तुलना में अधिक गति और सटीकता के साथ किया जा सकता है।AI-सहायता प्राप्त IVF प्रणाली प्रजनन चिकित्सा में एक क्रांतिकारी कदम है, यह न केवल प्रक्रिया की सटीकता और सफलता दर को बढ़ा सकती है, बल्कि IVF उपचार को अधिक सुलभ और किफायती भी बना सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के व्यापक उपयोग से पहले और अधिक अध्ययन और परीक्षण आवश्यक है। इस उपलब्धि ने प्रजनन चिकित्सा के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं, जिससे उन दंपतियों को आशा की नई किरण मिली है जो संतान प्राप्ति में कठिनाइयों का सामना कर रहे है।

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