बरगद के पेड़ पर छिपे संत को जबरन खिलाया,जब संत की ‘हठ’ के आगे झुका ईश्वर, डाकुओं को बनाया ‘सेवक’ – मलूक दास जी की चमत्कारिक कथा छप्पन भोग, आंखों से छलके आंसू तो बोले – ‘सबके दाता राम’
P Sharma कहा जाता है कि ईश्वर कण-कण में है, पर क्या वह बिना मांगे भी खिलाता है? इस सवाल…

