AI करवा रहा है मरे हुए लोगो से बात,यह सच्चाई आपको डरने पर मजबूर कर देगी,पढ़े पूरी जानकारी

P Sharma 

आज AI की दुनिया है।

AI के जरिये लोग अपने मरे हुए रिश्तेदारों और करीबियों से बात कर रहे हैं, लेकिन ये वास्तव में AI ही है, यह मृत लोगों की आवाज में बात करता है, उनके जैसे हाव-भाव रखता है।  इसके कुछ विपरीत परिणाम भी हैं, जो जरूर जानना चाहिए।

 ऐसा होता है, जब किसी रिश्तेदार या करीबी की मौत हो जाती है तो लोग उसे खूब याद करते हैं, उससे जुड़ी हुई चीजों को सहेज कर रखते हैं। उनके फोटोज और वीडियोज को बार-बार देखते हैं। कुछ लोगों की तो ये इच्छा भी होती है कि वे अपने मरे हुए रिश्तेदार से बात करें, लेकिन यह संभव नहीं है।परंतु, आज इस तकनीक के जमाने में इसका तरीका ढूंढ लिया गया है। ऐसा AI टूल ला चुका है, जो मरे हुए रिश्तेदार से आपकी बात करवा देगा, लेकिन ध्यान रहे ये AI ही होगा, जो उनकी तरह आपसे बातचीत करेगा।

मर चुके लोगों की आवाज में कर रहा बात

डेली स्टार में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, Creepy AI ऐसी सुविधा दे रहा है, जो लोगों से उनके मृत रिश्तेदार और करीबियों की आवाज में संवाद कर सकता है। इसमें एक ऐसा सॉफ्टवेयर है, जो मरे हुए लोगों की आवाज में बात करता है। यानी आपके मृत संबंधियों को डिजिटल रूप से जीवित कर सकता है। उनकी जैसी बात करना, उनकी आवाज में बोलना, वह तभी कर पाता है जब उसे मृत व्यक्ति के पैटर्न के बारे में पता हो

शुरुआत में तो लोगों को अपने मृत परिजनों से बात करके अच्छा लगा। वे रोज उनसे बात करने लगे, तरह-तरह का सलाह-मशविरा लेने लगे। लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोग इससे एक काल्पनिक दुनिया में जा रहे हैं, रियल वर्ल्ड में जीने की बजाय वे एक तरह का एस्केप खोज रहे है, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए थी नहीं है। दूसरा मुद्दा सुरक्षा का है, AI को अपने मृत रिश्तेदारों की जानकारी देना आपकी प्राइवेसी को तोड़ता है। AI इस डेटा को स्टोर करता है, जो आपके लिए सेंसेटिव हो सकता है।

इस पर कंपनी की राय भी सामने आई है। कंपनी का कहना है कि उनका मकसद किसी की प्राइवेसी का हनन करना नहीं है, बल्कि लोगों को अपने मरे हुए प्रियजनों से बातचीत करवाना है। कंपनी का तर्क है कि वह लोगों को अपने मृत रिश्तेदारों से इमोशनल बॉन्ड बनाए रखने का अवसर दे रही है। जबकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह लोगों की भावनाओं से खेलना या उनका शोषण करना हुआ।

इस चौंका देने वाले मामले पर मनोवैज्ञानिकों ने भी टिप्पणी की है। उनका कहना है कि यदि ऐसी तकनीक का इस्तेमाल बहुत लंबे टाइम तक लोग करते हैं, तो मुमकिन है कि वे असल दुनिया से कट जाएं। वे काल्पनिक दुनिया को ही वास्तविक दुनिया समझ सकते हैं। इससे वे मानसिक रूप से अस्थिर हो सकते हैं। एक यूजर ने भी यही कहा कि तकनीक अच्छी है, लेकिन लोगों को फिक्शनल वर्ल्ड में धकेल देगी

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