P Sharma
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के विकास खंड इटवा के ग्राम भदोखर स्थित प्राथमिक विद्यालय में तैनात प्रभारी प्रधानाध्यापक शौकिन्द्र (36 वर्ष) ने बुधवार रात कथित रूप से जहरीला पदार्थ खा लिया। उनकी तबीयत बिगड़ने पर प्रारंभिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज सिद्धार्थनगर रेफर कर दिया गया है।
सूत्रों से पता लगा है कि बीईओ (खंड शिक्षा अधिकारी) इटवा द्वारा बार-बार प्रताड़ित किए जाने और एक माह से वेतन रोके जाने से वे मानसिक रूप से परेशान थे।
शौकेंद्र मूल रूप से जनपद बागपत के निवासी हैं और इटवा क्षेत्र के महादेव घुरहू में किराए के मकान में रहकर सेवा दे रहे थे। यह भी जानकारी मिली है कि, बच्चों के आधार कार्ड न बनने के कारण बीईओ ने पांच-छह शिक्षकों का वेतन रोका था। बाद में सभी का वेतन बहाल हो गया, लेकिन शौकिन्द्र का वेतन अब भी बाधित रहा। उन्होंने इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजा
जिस पर वेतन जारी करने का निर्देश दिया गया। हालांकि, बीईओ ने नया आदेश जारी करते हुए कहा कि जब तक सभी रजिस्टर ऑनलाइन नहीं होंगे, तब तक वेतन आख्या नहीं दी जाएगी
बुधवार को इसी मुद्दे पर शौकिन्द्र और बीईओ के बीच व्हाट्सऐप पर बातचीत हुई। रात करीब आठ बजे उन्होंने जहरीला पदार्थ खा लिया। तो उन्हें सीएचसी इटवा ले जाया गया, जहां से मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। वर्तमान में उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।
घटना की सूचना पर प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राधेरमण त्रिपाठी ने बीईओ के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा, शिक्षकों को प्रताड़ित करने की यह घटना शिक्षा व्यवस्था के लिए शर्मनाक है। दोषी को सजा मिलनी चाहिए।
जबकि, प्रभारी बीईओ राजेश कुमार ने प्रताड़ना के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, शौकिन्द्र पारिवारिक रूप से परेशान रहते थे और स्कूल का कार्य प्रभावित हो रहा था। प्रताड़ना का आरोप बेबुनियाद है। कुछ लोग घटना को गलत रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वेतन रोकने का मामला प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। प्रशासन ने इस मामले में जांच प्रारंभ कर दिया है।

