P Sharma
*प्रेरणा: कलेक्ट्रेट के चक्कर से वित्त मंत्री तक का सफर, जानें ओ.पी. चौधरी की कहानी*
*रायपुर।* छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी का जीवन संघर्ष और दृढ़ निश्चय की मिसाल है। बचपन में पिता का साया सिर से उठने के बाद जिस कलेक्ट्रेट में मां के साथ पेंशन के लिए चक्कर लगाए, वहीं कलेक्टर बनकर उन्होंने सेवा की।
*बचपन का संकल्प बना मंजिल*
जब ओ.पी. चौधरी मात्र 8 वर्ष के थे, तब उनके सरकारी शिक्षक पिता का निधन हो गया। पिता की मृत्यु के बाद मां को पेंशन के काम के लिए बार-बार कलेक्ट्रेट जाना पड़ता था। मां के साथ कलेक्ट्रेट जाते हुए उन्होंने कलेक्टर पद की अहमियत देखी और तभी बचपन में ही IAS अधिकारी बनने का दृढ़ निश्चय कर लिया।
*पहले प्रयास में बने IAS*
ओ.पी. चौधरी ने 23 साल की उम्र में अपने पहले ही प्रयास में UPSC की परीक्षा पास कर ली। वे 2005 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के IAS अधिकारी बने।
*13 साल कलेक्टर, फिर राजनीति में एंट्री*
13 वर्षों तक उन्होंने कोरबा, दंतेवाड़ा और रायपुर जैसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण जिलों में कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दीं। दंतेवाड़ा जैसे नक्सल प्रभावित जिले में उनके काम की खूब सराहना हुई।
इसके बाद उन्होंने IAS के पद से इस्तीफा दे दिया और भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर राजनीति में कदम रखा।
*अब संभाल रहे वित्त मंत्रालय*
साल 2023 के विधानसभा चुनाव में ओ.पी. चौधरी ने रायगढ़ सीट से जीत हासिल की। वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ सरकार में *वित्त मंत्री* के पद पर कार्यरत हैं।
8 साल के बच्चे ने कलेक्ट्रेट की सीढ़ियां चढ़ते-चढ़ते तय कर लिया कि एक दिन यहीं कुर्सी पर बैठूंगा। और बैठा भी। फिर कुर्सी छोड़कर जनता के बीच आ गया।

