झारखंड।
गोड्डा में बचपन के दाेस्ताें ने दाेस्ती की मिसाल कायम की है। डेढ़ साल पहले वीरेंद्र कुमार (29) की सड़क हादसे में माैत हाे गई थी। बचपन के दाेस्ताें काे जानकारी मिली ताे एक-एक कर 40 दाेस्त जमा हुए। दाेस्त की बूढ़ी मां, पत्नी और दाे बच्चाें काे रहने-खाने की दिक्कत न हाे, इसलिए आपस में पैसे जमा किया। फिर 7 लाख रुपए खर्च कर घर बनवाया। गुजर-बसर के लिए हर महीने 15 हजार रुपए देते हैं। वीरेंद्र पेशे से फाेटाे-वीडियाेग्राफर थे। 22 दिसंबर 2019 को करगिल चाैक पर हाइवा के धक्के से उनकी माैत हाे गई थी। मां किरण देवी, पत्नी ऐश्वर्या और तीन साल के बेटे आरंभ पर विपत्तियाें का पहाड़ टूट पड़ा। इनके लिए बचपन के दाेस्त देवदूत बनकर खड़े हो गए।घर बनने पर इस साल सावन के पहले दिन गृह प्रवेश करना था, पर पूजा में पुरुष सदस्य काैन बैठे, इसे लेकर वीरेंद्र की मां किरण देवी चिंतित थी। इस पर दोस्तों ने फैसला किया कि वीरेंद्र का दोस्त कौस्तुभ ही पूजा पर बैठेगा। इस तरह काैस्तुभ ने गृह प्रवेश की पूजा की। दाेस्ताें ने गृह प्रवेश में परिवार के परिचिताें काे आमंत्रित किया और आयाेजन में किसी तरह की कमी नहीं हाेने दी। वीरेंद्र के परिवार को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए दाेस्त हमेशा हाल-चाल लेते रहते हैं।

लाल बहादुर, फरहान खान, मालिक सिन्हा, सुमन कुमार, कौस्तुभ कुमार, केडी, तन्नु, पवन कुमार, दिवाकर कुमार, राेशन कुमार, रघु कुमार, दिव्य प्रकाश, राहुल कुमार, ये कुछ नाम हैं दिवंगत वीरेंद्र के दोस्ताें के, जिन्हाेंने उसके परिवार की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। काैस्तुभ ने बताया कि वीरेंद्र किसी दोस्त के परिवार में शादी या अन्य कार्यक्रम में पैसाें की परेशानी हाेती ताे वह हमेशा खड़ा रहता था। वीरेंद्र किराए के मकान में रहता था। हमने उसकी खाली पड़ी जमीन पर घर बनवाने के लिए पैसाें का इंतजाम किया। किसी दाेस्त ने ईंट दी ताे किसी ने सीमेंट। खुद सिर पर ईंट-और सीमेंट ढाेकर मजदूरी की।

