गोंडा,14अप्रैल। बोधिसत्व बाबा साहेब डाॅ.भीमराव अम्बेडकर मानवता के मसीहा थे। वे नारी सशक्तिकरण के महानायक थे। हिन्दू कोड बिल के माध्यम से बाबा साहेब ने भारत की नारियों को सम्मान और अधिकार दिलाने का कार्य किया। आज अगर बाबा साहेब ने हम सबको संविधान में मौलिक अधिकार न देते तो प्रत्येक नागरिक राजतंत्र का शिकार होता। बाबा साहेब के लोकतंत्र में समता,स्वतन्त्रता,बंधुता,मैत्री और न्याय ही समता मूलक समाज की आधारशिला है। उक्त विचार बोधिसत्व डाॅ.अम्बेडकर के 134वें जन्मोत्सव के अवसर पर कलेक्ट्रेट परिसर में समिति के महासचिव ए.के.नन्द ने व्यक्त किया।

आरके राव ने कहा कि बाबा साहेब कहते थे कि शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो पीयेगा वही दहाड़ेगा।मानव मूल्यों और मानव कर्तव्यों के बाबा साहेब संरक्षक थे। बाबा साहेब भारत की आन-बान-शान और स्वाभिमान थे। जयराम सुमन ने कहा कि बाबा साहेब एक ऐसे मार्ग दर्शक थे जिससे प्रत्येक नागरिक शिक्षित होकर संगठित होना चाहिए और फिर अपने संवैधानिक अधिकार के लिए संघर्ष करना चाहिए। इसीलिए उनके तीन मंत्र हम सबके लिए महामंत्र का काम कर रहे हैं। वे हैं शिक्षित हों,संगठित रहो और संघर्ष करो। विशिष्ट अतिथि डा.राम लखन बाल रोग विशेषज्ञ ने कहा कि समाज के लोग शिक्षित जरूर हैं किन्तु संगठित नहीं हैं और इसीलिए हमारा संघर्ष असफल हो जाता है।

शिक्षित लोग हाथ खींचने के बजाय टाँग खींचने का कार्य कर रहे हैं। शिक्षित होने के फलस्वरूप ही जो लोग बाबा साहेब को छूना पसंद नहीं करते थे वे सब आज बाबा साहेब की जयजयकार कर रहे हैं। समिति के अध्यक्ष रमेश विमल ने कहा कि *बाबा साहेब एक महान राष्ट्रनायक थे और कभी भी मान-सम्मान और स्वाभिमान से उन्होंने समझौता नहीं किया। वे एक ऐसे समाज की रचना करना चाहते थे जहां वर्ण,वर्ग,जाति-पांत का नामोनिशान न हो और सभी लोग केवल भारतीय हों। वे स्वयं कहते थे कि मैं प्रथम भारतीय हूँ और अन्त तक केवल भारतीय हूँ और भारतीय के शिवा कुछ भी नहीं। ऐसी भावना ही राष्ट्रवादी की पहचान कराती है।* मुख्य अतिथि चन्द्रशेखर,परियोजना निदेशक ने कहा कि *बाबा साहेब एक विशुद्ध राष्ट्र भक्त थे। उन्होंने भारत के मान-सम्मान से कभी समझौता नहीं किया। गोलमेज सम्मेलन में बाबा साहेब ने अंग्रेजों के घर में दहाड़ते हुए कहा था कि भारत में 150वर्षों के शासन में अछूतों के जीवन में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। इसलिए जितनी जल्दी हो सके भारत से अपना बोरिया-बिस्तर बांधकर चले जाए। जितनी आबादी समूचे इंग्लैंड की है भारत में उतनी आबादी केवल अछूतों की है। हम ऐसी सरकार चाहते हैं जो जनता की हो,जनता के द्वारा हो और जनता के लिए हो।यह बुलंद आवाज एक सच्चे राष्ट्र भक्त की ही हो सकती है। बाबा साहेब ने कहा था कि भारत को सामाजिक लोकतंत्र की आवश्यकता है पूंजीवादी लोकतंत्र राष्ट्र के लिए घातक है। नायक पूजा समाज और राष्ट्र दोनों के लिए घातक है। श्रमिकों के दो ही महान शत्रु हैं पहला पूंजीवाद और दूसरी मनुवाद। ये दोनों श्रमिकों अपमान और अधिकार वंचित करने का कार्य करते हैं। बाबा साहेब एक महान कर्मयोगी थे। उनकी कथनी और करनी में सदैव एकरुपता रहती है। यह उनके चरित्र की कसौटी थी। उन्होंने हिन्दू धर्म में सुधार का प्रयास किया किन्तु उन्होंने देखा कि इसमें जरा सा भी सुधार की गुंजाइश नहीं है। इसलिए 13अक्टूबर 1935को घोषणा किया था कि मैं हिन्दू धर्म में पैदा हुआ यह मेरे वश की बात नहीं थी किन्तु हिन्दू होकर मरूंगा नहीं यह मेरे वश की बात है। अपने इस घोषणा को 21वर्षो के पश्चात 14अक्टूबर 1956को बुद्ध धम्म की दीक्षा लेकर पूरा किया। उनके जीवन में सामाजिक उत्तरदायित्व के रूप में वर्ण व जाति अव्यस्था से मुक्ति थी और दूसरा राष्ट्रीय उत्तरदायित्व था जिसे उन्होंने भारतीय संविधान लिखकर पूरा किया और तीसरा अन्तरराष्ट्रीय उत्तरदायित्व विश्वबन्धुता का था जिसे उन्होंने बुद्ध धम्म की दीक्षा लेकर पूरा किया। ऐसे अदम्य साहस के धनी थे बाबा साहेब डाॅ.अम्बेडकर। इसीलिए अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि अगर वे अमेरिका में पैदा होते तो उन्हें सिम्बल ऑफ नाॅलेज यानि ज्ञान के प्रतीक कहा जाता। भारत को दो महान ग्रंथ पहला भारत का संविधान और दूसरा बुद्ध और उनका धम्म लिखकर महान उपकार किया। ऐसे महानायक को शत-शत नमन-वंदन करना और उनके बताये गए मार्ग का अनुसरण करना ही उनके अनुयायी होने की पहचान है।* कार्यक्रम में राम शरण गौतम,अनूप गौतम,हरिप्रसाद,छोटे लाल,शशि आनंद,आरपी बौद्ध,किशोरीलाल,अजय सरोज,पवन कुमार,प्रमोद बरवार, राम पाल भाष्कर,हृदय नारायण,पाटनदीन आर्य,सुखदेव प्रसाद,सत्येन्द्र,राम करन वर्मा-एडवोकेट,राम चरन अनुरागी,सुशीला,इन्द्रावती,राजपति,सीमा मौर्य,उर्मिला बौद्ध,नीलम चौधरी,दशरथा बौद्ध, मनीता बौद्ध,अनीता बौद्ध,मीना बौद्ध,उर्मिला,अवध कुमारी,विमला देवी,पुनीता देवी,बिन्दू लाल,संजय मौर्य ने सहभाग किया।

