एक रहस्यमई संत,76 साल तक न कुछ खाया न पिया,वैज्ञानिकों ने किया बहुत शोध,रहे असफल

P Sharma 
DRDO-DIPAS ने दो बार किया था शोध; 15 दिन शीशे के कमरे में निगरानी, वैज्ञानिक भी रह गए थे हैरान

*अहमदाबाद।* गुजरात के काठियावाड़ के प्रसिद्ध संत प्रह्लाद जानी ‘चुनरी वाली माताजी’ का 26 मई 2020 को 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके भक्तों का दावा है कि उन्होंने 76 साल तक अन्न-जल ग्रहण नहीं किया और सिर्फ प्राण वायु के सहारे जीवित रहे।

*DRDO और AIIMS ने किया शोध*
संत प्रह्लाद जानी के इस दावे की जांच के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की संस्था DIPAS ने 2003 और 2010 में दो बार वैज्ञानिक अध्ययन किया। 2010 में अहमदाबाद के स्टर्लिंग हॉस्पिटल के एक शीशे के चैंबर में 15 दिन तक 40 डॉक्टरों की टीम ने 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी में उनका परीक्षण किया।

शोध के दौरान उनका टेम्परेचर, बीपी, हार्ट बीट, ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफाइल, सीबीसी, किडनी-लिवर फंक्शन जैसे टेस्ट लगातार किए गए। वैज्ञानिकों के अनुसार, 15 दिनों में संत ने एक बूंद पानी या अन्न नहीं लिया। 24 घंटे में औसतन 100 ml पेशाब होता था, लेकिन मल त्याग एक बार भी नहीं किया।

DIPAS की रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष दिया कि संत जी एक ‘अज्ञात रहस्यमयी प्राण शक्ति’ से ऊर्जा ग्रहण करते हैं। DRDO ऐसे शोध इसलिए करता है ताकि विकट परिस्थितियों में सैनिक बिना खाए-पिए भी जीवित रह सकें।

*भक्तों का दावा: भगवती महामाया का वरदान*
भक्तों के अनुसार, 9 वर्ष की आयु में भगवान श्रीनाथ की पूजा करते समय भगवती महामाया प्रकट हुईं। वरदान मांगने पर उन्होंने ‘कभी भूख-प्यास न लगने’ का आशीर्वाद दिया। तब से उनके तालु से अमृत गिरने का दावा किया जाता था। न बड़ा आश्रम, न अरबों की दौलत, फिर भी उनके दावे ने विज्ञान जगत को सोचने पर मजबूर किया।

  वैज्ञानिक निगरानी का ब्योरा
`अवधि:` 2010 में 15 दिन, स्टर्लिंग हॉस्पिटल
`निगरानी:` 40 डॉक्टर, 24×7 CCTV, शीशे का चैंबर
`निष्कर्ष:` अन्न-जल नहीं लिया, मल त्याग नहीं
`पेशाब:` 24 घंटे में औसतन 100 ml
`संस्था:` DIPAS-DRDO, AIIMS के वैज्ञानिक शामिल
`निधन:` 26 मई 2020, आयु 90 वर्ष

 

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