P Sharma
*गोंडा।* इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना गोंडा मेडिकल कॉलेज में सामने आई है। गुरुवार को इलाज के दौरान 35 वर्षीय गीता देवी की मौत हो गई। मौत के वक्त उनके साथ सिर्फ उनका 7 साल का बेटा अर्पित था। मासूम अर्पित 24 घंटे तक मां के शव के पास बैठकर अंतिम संस्कार के लिए मदद का इंतजार करता रहा।
*क्या हुआ था पूरा मामला* 👇
गीता देवी निवासी मया बाजार, अयोध्या, अपने बेटे अर्पित के साथ लुधियाना से ट्रेन से गोंडा पहुंची थीं। गोंडा रेलवे स्टेशन से रोडवेज बस स्टॉप पर अयोध्या जाने की तैयारी कर रही थीं, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। मासूम अर्पित ने रोते-रोते लोगों से मदद मांगी। स्थानीय लोगों ने एंबुलेंस बुलाकर मां-बेटे को मेडिकल कॉलेज भिजवाया, जहां इलाज के दौरान गीता ने दम तोड़ दिया।
*24 घंटे तक अकेला रहा मासूम*
मां की मौत के बाद अर्पित बिलखता रहा। वह अपने परिवार के बारे में कुछ बता नहीं पा रहा था। सूचना पर नगर कोतवाली पुलिस पहुंची और अर्पित को अपने साथ ले गई। गीता के शव को मोर्चरी में रखवा दिया गया।
*हिंदू संगठनों ने निभाया फर्ज*
24 घंटे बीत जाने के बाद भी जब कोई परिजन सामने नहीं आया, तो शुक्रवार को विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और सनातन समिति के कार्यकर्ता आगे आए। उन्होंने मोर्चरी से गीता का शव लिया और 7 वर्षीय अर्पित को साथ लेकर कच्चे बाबा घाट पहुंचे। वहां पूरे विधि-विधान से मासूम अर्पित ने ही अपनी मां को मुखाग्नि दी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
*पति ने छोड़ दिया था साथ*
जानकारी के मुताबिक, गीता ने 9 साल पहले घर से भागकर दिनेश उर्फ प्रदीप कुमार से प्रेम विवाह किया था। दो साल पहले पति ने गीता को छोड़कर दूसरी शादी कर ली। तब से गीता अपने बेटे अर्पित के साथ अकेले जीवन गुजार रही थीं।
*एक सवाल छोड़ गई ये घटना*
एक मां ने दुनिया छोड़ दी और 7 साल का बच्चा 24 घंटे तक सिस्टम और समाज की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देखता रहा। अगर हिंदू संगठन आगे न आते तो क्या होता? ये घटना समाज के हर शख्स से सवाल पूछ रही है।

