P sharma
*बहराइच।* जब हौसला बुलंद हो तो नामुमकिन भी मुमकिन हो जाता है। इसे सच कर दिखाया है जरवल कस्बे के प्रगतिशील किसान ताज मोहम्मद ने। उन्होंने बहराइच की गर्म जलवायु में सेब की सफल खेती कर सभी को चौंका दिया है।
आमतौर पर सेब की खेती जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे ठंडे पहाड़ी इलाकों में होती है। 35 से 45 डिग्री तापमान वाले बहराइच में सेब उगाना किसी चुनौती से कम नहीं था। लेकिन ताज मोहम्मद ने दो बीघा जमीन में कम गर्मी सहन करने वाली HRMN-99 और अन्ना किस्म के सेब के पौधे लगाकर यह कर दिखाया।
ताज मोहम्मद बताते हैं कि शुरुआत में लोगों ने मजाक उड़ाया। कहा कि बहराइच में सेब कहां होगा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। यू-ट्यूब से जानकारी ली, कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क किया और हिमाचल से पौधे मंगवाए। दो साल की कड़ी मेहनत, सही सिंचाई, जैविक खाद और नियमित देखभाल के बाद इस साल पेड़ों पर भरपूर फल आए।
उनके बाग में इस समय सेब के पेड़ फलों से लदे हैं। एक पेड़ से 15 से 20 किलो तक उत्पादन मिल रहा है। बाजार में लोकल सेब 120 से 150 रुपये किलो तक बिक रहा है। इससे अच्छी आमदनी की उम्मीद है।
ताज मोहम्मद की इस सफलता ने जिले के दूसरे किसानों के लिए भी नई राह खोल दी है। जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि गर्म इलाकों के लिए विकसित नई किस्मों से अब मैदानी क्षेत्रों में भी सेब की खेती संभव है। विभाग किसानों को तकनीकी मदद और अनुदान देने को तैयार है।
ताज मोहम्मद कहते हैं कि किसान अगर परंपरागत खेती से हटकर कुछ नया सोचें तो मुनाफा कई गुना बढ़ सकता है। उनकी कामयाबी अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई है। आसपास के किसान उनका बाग देखने और जानकारी लेने पहुंच रहे हैं।
बहराइच की धरती पर लहलहाते सेब के पेड़ बता रहे हैं कि मेहनत और तकनीक से खेती की तस्वीर बदली जा सकती है।

