इटावा:एसएसपी की मां की तबियत खराब होने पर जबरदस्ती पुलिसवाले इमरजेंसी के डॉक्टर को उठा ले गए

P Sharma 
 इटावा में खाकी के रसूख का एक शर्मनाक बाकया सामने आया है, जहां जिले के SSP की मां बीमार पड़ने पर पुलिसकर्मी एक सरकारी अस्पताल की इमरजेंसी से डॉक्टर को जबरन उठाकर ले गए। यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिसवालों ने डॉक्टर से अभद्रता की, उन्हें धमकाया और एक अपराधी की तरह जबरन उन्हें इमरजेंसी की ड्यूटी के दौरान गाड़ी में ले गए। इस घटना के बाद अस्पताल के सभी डॉक्टरों  ने हड़ताल कर दी है, जिससे अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बंद हो गई।

यह पूरा वाकया शहर के डॉ. भीमराव अंबेडकर संयुक्त चिकित्सालय का है, जहां बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात को यह घटना घटी। एसएसपी की मां की तबीयत बिगड़ गई इस पर थाने के कुछ सिपाही और एक दरोगा आधी रात को अस्पताल की इमरजेंसी में  गए और वंहा उन्होंने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर जिसका नाम राहुल बाबू  था उसे एसएसपी के घर चलने को कहा। जब डॉक्टर ने इमरजेंसी छोड़कर जाने से मना किया तो पुलिस वाले बदसलूकी करने लगे। डॉक्टर राहुल बाबू के साथ एक फार्मासिस्ट को भी जबरदस्ती ले गए।
पीड़ित डॉक्टर राहुल बाबू ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, “रात में तीन-चार पुलिसवाले आए और बोले कि SSP साहब की मां को देखना है। हम किसी और स्टाफ को भेजने की व्यवस्था कर ही रहे थे कि वे लोग बदतमीजी करने लगे। वे कहने लगे कि क्या तुम एसएसपी साहब से बड़े हो गए हो? उन्होंने मेरा मोबाइल छीन लिया और हमें घसीटकर जबरदस्ती गाड़ी में डालकर सिविल लाइन थाने ले गए। हम बार-बार कहते रहे कि इमरजेंसी से नहीं जा सकते, किसी और को भेज देते हैं, लेकिन उन्होंने हमारी एक नहीं सुनी।” इस घटना से आक्रोशित होकर अस्पताल के पूरे स्टाफ ने काम बंद कर दिया और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग पर अड़े है।
मामले की जानकारी मिलते ही इटावा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बी.के. सिंह अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों से बात की। उन्होंने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा, “इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर और फार्मासिस्ट को बलपूर्वक ले जाना एक संगीन अपराध है। इससे सरकारी काम में बाधा पहुंची है। इमरजेंसी में मरीज के लिए एक-एक मिनट कीमती होता है। कानून सबके लिए बराबर है और इस मामले में जो भी कानूनी कार्रवाई होगी, वह की जाएगी।” उन्होंने डॉक्टरों से  सेवा फिर से शुरू करने की अपील की, लेकिन डॉक्टर दोषियों पर कार्रवाई के बिना कोई बात मानने को तैयार नहीं हैं।

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