P Sharma
यूपी की योगी सरकार ने मोटी फीस लेकर बच्चों को पढ़ाने वाले प्राइवेट स्कूलों पर शिकंजा कस दिया है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की सख्ती के बाद सभी स्कूलों के टीचरों की योग्यता की जांच का आदेश दिया गया है।
उत्तर प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। प्रदेश के सभी निजी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों की शैक्षिक अर्हता की व्यापक जांच कराई जाएगी। यह कदम राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा व्यक्त की गई नाराज़गी के बाद उठाया गया है। कई निजी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति में निर्धारित मानकों की खुले तौर पर अनदेखी की जा रही थी, जिसके बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सभी जिलों में जांच प्रक्रिया तेज करने का आदेश जारी किया है।
कार्रवाई की शुरुआत तब हुई जब झांसी निवासी राहुल जैन ने एनसीटीई को प्रमाणों के साथ एक विस्तृत शिकायत भेजी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रदेश के अनेक निजी विद्यालयों में ऐसे शिक्षक पढ़ा रहे हैं जिनके पास न तो डीएलएड (BTC), न बीएड डिग्री है, न ही वे सीटीईटी या टीईटी उत्तीर्ण हैं। ये सभी योग्यताएं एनसीटीई द्वारा निर्धारित अनिवार्य मानकों का हिस्सा हैं। राहुल जैन ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्कूलों में शिक्षक बिना किसी प्रशिक्षित डिग्री के केवल कम वेतन के आधार पर नियुक्त किए जाते हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एनसीटीई ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा विभाग को मामले की तत्काल जांच का निर्देश दिया।
जिला विद्यालय निरीक्षकों को मिले सख्त निर्देश***
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इस मामले पर गंभीर रुख अपनाते हुए तत्काल आदेश जारी किए कि प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) अपने-अपने जनपदों में संचालित सभी निजी विद्यालयों में शिक्षकों की शैक्षिक अर्हता का विस्तृत ब्यौरा तैयार करें।
जांच में शामिल होगा **
शिक्षक का नाम व पद
शैक्षिक योग्यता
प्रशिक्षित डिग्री (डीएलएड, बीएड)
सीटीईटी/टीईटी योग्यता
नियुक्ति पत्र व चयन प्रक्रिया
नियमानुसार वेतन भुगतान
जांच में पाया जाएगा कि शिक्षक वास्तव में एनसीटीई द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करते हैं या नहीं। यदि कोई शिक्षक अयोग्य पाया गया, तो उसे तुरंत शिक्षण कार्य से हटाने का आदेश दिया जाएगा।
अयोग्य शिक्षको को हटाया जायेगा और प्रबंधन तंत्र पर कार्यवाही भी किया जाएगा।
ऐसे प्राइवेट स्कूलों पर निम्न कार्यवाही किया जा सकता है।
1.स्कूल की मान्यता निलंबित की जा सकती है
2.प्रबंधन पर आर्थिक दंड लगाया जा सकता है
3.जिम्मेदार पदाधिकारियों पर व्यक्तिगत कार्रवाई भी संभव
यह पहली बार है जब राज्य स्तर पर सभी जिलों में इतनी व्यापक जांच एक साथ की जा रही है।

