गोंडा के डॉ. दिनेश विश्वकर्मा विश्व के टॉप 5% वैज्ञानिकों में शामिल, जिले का बढ़ाया मान 

P Sharma 

गोंडा के डॉ. दिनेश विश्वकर्मा विश्व के टॉप 5% वैज्ञानिकों में शामिल, जिले का बढ़ाया मान 

 ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकले जल संसाधन वैज्ञानिक; 86 शोध-पत्र, 3787 उद्धरण, h-index 33

*गोंडा।* जनपद के विकास खंड बेलसर स्थित ग्राम बरसरा निवासी युवा वैज्ञानिक *डॉ. दिनेश कुमार विश्वकर्मा* ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2026 में उन्हें *विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों* की सूची में स्थान मिला है। उनकी यह उपलब्धि गोंडा ही नहीं, पूरे उत्तर प्रदेश और देश के लिए गौरव का विषय है।

*ग्रामीण परिवेश से वैश्विक पहचान तक का सफर*  

15 मार्च 1992 को स्वर्गीय श्री कन्हैया लाल विश्वकर्मा के परिवार में जन्मे डॉ. विश्वकर्मा ने शुरुआती पढ़ाई गांव में ही की। 2009 में श्री गांधी विद्यालय इंटर कॉलेज, नवाबगंज से इंटरमीडिएट में *स्कूल टॉपर* रहे। इसके बाद कुमारगंज, अयोध्या से बी.टेक., SKUAST-K श्रीनगर से एम.टेक. और पंतनगर से 2025 में इरिगेशन एवं ड्रेनेज इंजीनियरिंग में *पीएच.डी.* की। सभी परीक्षाएं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कीं।

*वर्तमान में कहां हैं*  

डॉ. विश्वकर्मा फिलहाल *ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी, देहरादून* के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में *सहायक प्रोफेसर* हैं। इससे पहले SKUAST-K में राष्ट्रीय स्तर की परियोजनाओं में स्प्रिंगशेड प्रबंधन और जलवायु-अनुकूल जल संरक्षण पर काम कर चुके हैं।

*अंतरराष्ट्रीय सम्मान*  

2024 में उन्हें *Hydrological Sciences Journal Reviewer Award* मिला, जो *IAHS और IUGG* द्वारा दिया जाता है। यह सम्मान उस वर्ष दुनिया के केवल चार वैज्ञानिकों को मिला था। साथ में £200 की पुरस्कार राशि भी दी गई।

*शोध का कद*  

डॉ. विश्वकर्मा के अब तक *86 शोध-पत्र* प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में छप चुके हैं। एक संपादित पुस्तक, 13 पुस्तक अध्याय और 3 लोकप्रिय विज्ञान लेख भी लिखे हैं। *Google Scholar* पर उनके *3,787 से अधिक उद्धरण*, *h-index 33* और *i10-index 62* है।

*विशेषज्ञता का क्षेत्र*  

मृदा एवं जल संरक्षण, सतही-भूजल जल विज्ञान, सिंचाई-जल निकास, वाटरशेड मॉडलिंग, रिमोट सेंसिंग-जीआईएस, जलवायु परिवर्तन का जल संसाधनों पर प्रभाव जैसे विषयों पर काम करते हैं। उनका फोकस *जल सुरक्षा, सतत कृषि और किसानों के लिए व्यावहारिक समाधान* पर है।

*आगे की योजना*  

डॉ. विश्वकर्मा ने बताया कि वे विश्व के प्रतिष्ठित संस्थानों में *पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च* करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय ज्ञान को भारत की जल-कृषि चुनौतियों के समाधान में लगाना है ताकि ग्रामीण समुदायों को सीधा लाभ मिले।

 

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