P Sharma
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पुलिस दस्तावेजों और सार्वजनिक स्थानों पर जाति का उल्लेख बंद करने का आदेश जारी हुआ है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के तहत एफआईआर, गिरफ्तारी रिकॉर्ड, वाहनों, साइन बोर्ड, और सोशल मीडिया पर जाति से संबंधित संकेतों पर रोक लगाई गई है।
पुलिस दस्तावेजों, एफआईआर, और सार्वजनिक स्थानों पर जाति के उल्लेख पर रोक लगाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के 16 सितंबर 2025 के आदेश के पालन में मुख्य सचिव दीपक कुमार ने सभी संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि पुलिस दस्तावेजों, जैसे एफआईआर और गिरफ्तारी रिकॉर्ड में, आरोपियों की जाति का उल्लेख नहीं किया जाएगा. इसके साथ ही, सार्वजनिक स्थानों, वाहनों, साइन बोर्ड, और सोशल मीडिया पर जाति से संबंधित संकेतों या नारों के प्रदर्शन पर भी रोक लगाने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने जाति के आधार पर होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रमों पर भी प्रतिबंध लगाने की बात कही थी।
अब जाति के नाम पर कोई सार्वजनिक कार्यकर्म भी नहीं किया जाएगा
यूपी मुख्य सचिव दीपक कुमार ने ये निर्देशों को लागू करने के लिए सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, पुलिस महानिदेशक , पुलिस कमिश्नरों, जिलाधिकारियों , और जिला पुलिस कप्तानों को पत्र जारी किया गया है।इसमें कहा गया है कि गिरफ्तारी के रिकॉर्ड में अब जाति का उल्लेख हटाकर संबंधित व्यक्ति के माता-पिता के नाम जोड़ा जाएगा। इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक स्थानों जैसे नोटिस बोर्ड, वाहनों, और साइन बोर्ड से जातीय संकेतों और नारों को तत्काल हटाने के निर्देश दिए गए हैं। जिला और प्रवेश प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि जाति के आधार पर कोई सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित न हो।
हाईकोर्ट का यह आदेश सामाजिक एकता को बढ़ावा देने और जातिगत भेदभाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम कहा जा रहा है।मुख्य सचिव ने सभी अधिकारियों से इस आदेश का सख्ती से पालन करने और इसकी प्रगति की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया है।

