नाना नहीं रहे: 35 रुपये में पोस्टर पेंट करने वाले लड़के से पद्मश्री तक का सफर खत्म,अरबपति होते हुए फकीर बन कर रहे

P Sharma 

गोवा में कार्डियक अरेस्ट से निधन, 45 मिनट तक CPR के बाद भी नहीं लौटे

भारतीय सिनेमा के सबसे दमदार अभिनेताओं में से एक नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह निधन हो गया। वे 75 वर्ष के थे। गोवा के मणिपाल हॉस्पिटल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर के अनुसार, उन्हें अपने गोवा स्थित घर पर जबरदस्त कार्डियक अरेस्ट आया था।

डॉ. सालकर ने बताया, “सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत लाया गया। मेडिकल टीम ने लगभग 45 मिनट तक लगातार CPR देकर होश में लाने की कोशिश की, लेकिन हम उन्हें बचा नहीं सके।” इस मामले में मेडिको-लीगल केस दर्ज किया गया है।

1 जनवरी 1951 से 35 रुपये तक का संघर्ष

असली नाम विश्वनाथ पाटेकर। जन्म महाराष्ट्र के मुरुड-जंजीरा में। पिता गजानन पाटेकर कपड़ा व्यापारी थे। एक करीबी के धोखे से पूरी जमा-पूंजी खत्म हो गई और परिवार अमीरी से सीधे गरीबी में आ गया। 13 साल की उम्र में नाना को काम संभालना पड़ा। स्कूल के बाद कई किलोमीटर पैदल चलकर फिल्मों के पोस्टर पेंट करते थे, जिसके बदले 35 रुपये और खाना मिलता था। वही अपमान और संघर्ष उनकी एक्टिंग की असली पाठशाला बना।

गमन से नटसम्राट तक

1978 में ‘गमन’ से शुरुआत, लेकिन पहचान 1989 में विधु विनोद चोपड़ा की ‘परिंदा’ से मिली – पहला नेशनल अवॉर्ड। फिर ‘क्रांतिवीर’ (1994) के लिए बेस्ट एक्टर और ‘अग्निसाक्षी’ (1996) के लिए फिर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर – कुल 3 नेशनल अवॉर्ड। ‘अपहरण’, ‘अब तक छप्पन’, ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी और मराठी की ‘नटसम्राट’ – हर किरदार क्लासिक। इंडस्ट्री कहती है, नाना का एक क्लोज-अप शॉट कई पन्नों के संवादों पर भारी है। 2013 में पद्मश्री।

करोड़पति होकर भी फकीर

कुल संपत्ति 80 करोड़ से ज्यादा, फीस 2-3 करोड़ प्रति फिल्म, फिर भी जिंदगी बेहद सादी। मुंबई के छोटे फ्लैट, पुणे में खड़कवासला का 27 एकड़ फार्महाउस – सात कमरे, लकड़ी का फर्नीचर, टेराकोटा फर्श। वहां खुद गेहूं-धान उगाते और कमाई मजदूरों-किसानों में बांट देते। पुणे के लॉ कॉलेज रोड, गोवा और मुरुड में भी घर, लेकिन दिल गांव में ही बसता था। KBC में कहा था – “शहर की भागदौड़ से ज्यादा गांव का सुकून पसंद है।”

परिवार

1978 में नीलकंती पाटेकर से विवाह, बाद में अलगाव। दो बेटे, एक का बचपन में निधन, दूसरे बेटे मल्हार पाटेकर ही अब परिवार में हैं।

नाना पाटेकर चले गए, लेकिन उनकी वो आंखें, वो आवाज – “एक मच्छर आदमी को…” आज भी हर दिल में जिंदा रहेगी।

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